Tuesday, December 7, 2010

चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा...

चहारदीवारी का चोर दरवाज़ा...

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ज़िन्दगी और सपनों के चारों तरफ
ऊँची चहारदीवारी
जन्म लेते ही
तोहफ़े में मिलती है,
तमाम उम्र
उसी में कैद रहना
शायद मुनासिब भी है
और ज़रूरत भी,
पिता भाई और
पति पुत्र का कड़ा पहरा
फिर भी असुरक्षित
अपने ही किले में!

चहारदीवारी में एक मज़बूत दरवाज़ा होता
जिससे सभी अपने और रिश्ते
ससम्मान साधिकार प्रवेश पाते,
लेकिन उनमें कइयों की आँखें
निर्वस्त्र कर जाती सबके सामने,
कुछ को बस मौका मिला
और ज़रा-सा छू कर तृप्त,
कइयों की आँखें लपलपाती
और भेड़िये सा टूट पड़ते,
ख़ुद को शर्मसार होने का भय
फिर स्वतः कैद
हो जाती ज़िन्दगी!

पर उन चहारदीवारी में
एक चोर दरवाज़ा भी होता
जहाँ से मन का राही प्रवेश पाता,
कई बार वही पहला साथी
सबसे बड़ा शिकारी निकलता,
प्रेम की आड़ में भूख़ मिटा
भाग खड़ा होता,
ठगे जाने का दर्द छुपाये
कब तक तन्हा जिए,
वक़्त का मरहम
दर्द को ज़रा कम करता
फिर कोई राही प्रवेश करता,
कदम-कदम फूँक कर
चलना सीख जाने पर भी,
नया आया हमदर्द
बासी गोश्त कह
छोड़ चला जाता!
यकीं टूटता पर
सपने फिर सँवरने लगते,
चोर दरवाज़े पर
उम्मीद भरी नज़र टिकी होती,
फिर कोई आता और रिश्तों में बाँध
तमाम उम्र को साथ ले जाता,
नहीं मालूम क्या बनेगी
महज़ एक साधन जो
जिस्म, रिश्ता और रिवाज़ का फ़र्ज़ निभाएगी,
या फिर चोर दरवाज़े पर टकटकी लगाए
अपने सपनों को उसी राह
वापस करती रहेगी,
या कभी कोई और प्रवेश कर जाए
तो उम्मीद से ताकती
नहीं मालूम
वो गोश्त रह जायेगी या जिस्म,
फिर एक और दर्द
और चोर दरवाज़ा जोर से
सदा के लिए बंद!

चहारदीवारी के भीतर भी
जिस्म से ज्यादा
और कुछ नहीं,
चोर दरवाज़े से भी
कोई रूह तक नहीं पहुँचता,
क्यों आख़िर?  

- जेन्नी शबनम (नवम्बर 1990)

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4 comments:

वन्दना said...

चहारदीवारी के भीतर भी
जिस्म से ज्यादा
और कुछ नहीं,
चोर दरवाज़े से भी
कोई रूह तक नहीं पहुँचता,
क्यों आख़िर ?

बस यही खलिश रहती है…………जो जिस्म के पार पहुंच जाये तो ये 'क्यों' न मिट जाये।

Mukesh Kumar Sinha said...

Jenny Di!!! stri man ya uske dard ko itne pyare dhang se aapne kaha aankhe chhalchhala gayeee...hats off!!

संजय भास्कर said...

यकीं टूटता पर
सपने फिर सँवरने लगते,
चोर दरवाज़ा पर
उम्मीद भरी नज़र टिकी होती,
फिर कोई आता और रिश्तों में बाँध
तमाम उम्र को साथ ले जाता,

.........सुन्दर शब्द संयोजन।
किसकी बात करें-आपकी प्रस्‍तुति की या आपकी रचनाओं की। सब ही तो आनन्‍ददायक हैं।

Rajesh Chaudhary said...

Dil ko chhoo lene wali aapki rachnayen hain.. "Chahardiwari ka chor darwaja" bahut hi pyaara hai.. ek stree man ko bahut achche dhang se aapne vyakt kiya hai.. You are great..