Saturday, April 9, 2011

अजनबियों सा सलाम...

अजनबियों सा सलाम...

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मुलाक़ात भी होगी
नज़रों से एहतराम भी होगा,
दो अजनबियों सा कोई सलाम तो होगा!

__ जेन्नी शबनम __ 6. 4. 2011

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8 comments:

mridula pradhan said...

salaam zaroor hoga......bahut achchi lagi.

सहज साहित्य said...

मुलाक़ात भी होगी
नज़रों से एहतराम भी होगा,
दो अजनबियों सा कोई सलाम तो होगा!
-इन तीन पंक्तियों में आपने सारे अभिवादन समेट लिये हैं। जहाँ नितान्त अपनापन हो , वहाँ सारे अभिवादन और औपचारिकताएँ साथ छोड़ देती हैं । जो रह जाता है , वह सिर्फ़ एक तरल संवेदना , जिसे हृदय महसूस करता है , भाषा मूक होकर रह जाती है । बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति !

Udan Tashtari said...

जरुर होगा...

आक्रोशित मन ...ना माने मन की बात said...

लूट जायेगे मिट जायेगे ...दिल मिलने का सब खेल , दीवाने फिर भी चाहेगे ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा शेर लिखा है आपने।

रश्मि प्रभा... said...

zarur zarur hoga

NISHANTBALIYAN(SAJAN) said...

MAM BAHUT ACHCHHA SHER HAI. SALAM.

KAHI UNKAHI said...

एक अजनबी का सलाम आपके लिए...।

प्रियंका