गुरुवार, 6 जनवरी 2011

नए साल में मेरा चाँद...

नए साल में मेरा चाँद...

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चाँद के दीदार को
हम तरस गए,
अल्लाह...
अमावास का अंत
क्यों होता नहीं?
मुमकिन है
नया साल
चाँद से
रूबरू करा जाए...

__ जेन्नी शबनम __ १. १. २०११

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10 टिप्‍पणियां:

फणि राज मणि चन्दन ने कहा…

aameen...

Regards,
Fani Raj

फणि राज मणि चन्दन ने कहा…

aameeen...

Naya saal mubaarak ho :-)

Regards
Fani Raj

रश्मि प्रभा... ने कहा…

aameen

sada ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द ।

संजय भास्कर ने कहा…

वाह , क्या ग़ज़ब बात कही है ।
बहुत सुन्दर ।

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही अच्छे एहसास के साथ लिखी गई है.... हर नज़्म बहुत ही सुंदर

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

ummid karte hain ham bhi...naye saal me 365 din punam ki raat ho...aur sirf jagmag karti raaat...:)

bahut khub...jenny di...

mridula pradhan ने कहा…

wah.choti si per behad khoobsurat.

nilesh mathur ने कहा…

वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर! नव वर्ष की शुभकामना!

सहज साहित्य ने कहा…

नया साल लाए जीवन में चाँदनी
हर घड़ी आपकी हो मनभावनी ।
अधेरे कभी जीवन में न आएँ ।
जीवन की बगिया में फूल मुस्काएँ ।