Monday, January 2, 2012

एक नई शुरुआत...

एक नई शुरुआत...

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माना कि बहुत कुछ छूट गया
एक और सपना टूट गया,
पार कर लिया तो कर लिया
उस रास्ते पर दोबारा क्यों जाना
जहाँ पाँव में छाले पड़े
सीने में शूल चुभे
बोझिल साँसे जाने कब रुके !

सपने जीवन का अंत नहीं
एक नई शुरुआत भी तो है,
कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे
बार-बार नहीं देखो वैसे सपने
जिसके टूटने पर
ज़िन्दगी अपनी अहमियत खो दे !

नई राह में
संभावना तो है
कि शायद
एक नई दिशा मिले
जो जीवन के लिए लाज़िमी हो
जहाँ सुकून के कुछ पल हों
और सपनों को मंज़िल मिले !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 1, 2012)

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16 comments:

दर्शन कौर said...

बहुत खुब सुरत हे आपकि अभिलाशा …ंनूतनवर्श कि अनेक शुभकामनाएं …॥

अनुपमा पाठक said...

सम्भावना है... तो जीवन है...!
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!
लिखती रहे सतत:)

ASHA BISHT said...

sapnon se saji sundar kavita..

मनीष सिंह निराला said...

एक सुखद सन्देश देती रचना !
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

Rajput said...

कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे...

होशला अफजाई से सरोबर सुन्दर रचना .
नववर्ष की शुभ कामनाये.

mridula pradhan said...

कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे
behad prernadayak.....

वन्दना said...

नयी राहें नयी मंज़िल देती हैं।

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
नव वर्ष की शुभकामनायें|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

दस दिनों तक नेट से बाहर रहा! केवल साइबर कैफे में जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन आज से मैं पूरी तरह से अपने काम पर लौट आया हूँ!
नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

vidya said...

बहुत सुन्दर रचना...
नववर्ष शुभ हो...

ऋता शेखर 'मधु' said...

नई राह में
संभावना तो है
कि शायद
एक नई दिशा मिले
जो जीवन के लिए लाज़िमी हो
जहाँ सुकून के कुछ पल हों
और सपनों को मंज़िल मिले !

बहुत अच्छी बात कही है जेन्नी जी आपने
राह तो खुद तलाशना होता है|

***Punam*** said...

आपको भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ....

प्रेम सरोवर said...

आपका पेस्ट अच्छा लगा । मरे अगले पोस्ट "जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपका बेसव्री से इंतजार रहेगा । नव वर्ष की अशेष शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

सहज साहित्य said...

प्रिय बहिन आपकी ये पंक्तिया बहुत सार्थक और सकारात्मक हैं । हर निराश दिल में उम्मीदों का चिराग़ जलाने की ताकत है इन पंक्तियों में-सपने जीवन का अंत नहीं
एक नई शुरुआत भी तो है,
कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे
बार-बार नहीं देखो वैसे सपने
जिसके टूटने पर
ज़िन्दगी अपनी अहमियत खो दे !-आपको हार्दिक बधाई !

Monika Jain "मिष्ठी" said...

कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे.
bahut khoob.
Welcome to मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली

Rakesh Kumar said...

नई राह में
संभावना तो है
कि शायद
एक नई दिशा मिले
जो जीवन के लिए लाज़िमी हो
जहाँ सुकून के कुछ पल हों
और सपनों को मंज़िल मिले !

बहुत सुन्दर और प्रेरक प्रस्तुति.
बहुत बहुत आभार,जेन्नी जी.