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बुधवार, 1 जनवरी 2025

786. नव वर्ष (20 हाइकु)

नव वर्ष 

***

1.
मन में आस-
नव वर्ष की भोर
हो पुनर्जन्म।

2.
लेकर आशा
नव वर्ष है आया
शुभ सन्देश।

3.
उँगली थामे
नव वर्ष की भोर
घूमने चली।

4.
चहकती है
नव वर्ष की भोर
ख़ूब है शोर।

5.
ठिठुरन है
पर मन में जोश
नूतन वर्ष। 

6.
पहली तिथि
नव वर्ष की भोर
ठण्ड से काँपी।

7.
जश्न की रात
स्वागत में संसार
नवीन वर्ष।

8.
धुँध में आई
नव वर्ष की भोर
मन विभोर।  

9.
दुःख को भूलें
नव वर्ष का दिन
स्वागत करें।

10.
नवीन वर्ष
उमंग पसारने
फिर से आया। 

11.
पिछला वर्ष
बना है इतिहास
याद आएगा।

12.
नूतन वर्ष
धक्का देके भगाया
पुराना वर्ष।

13.
साल पुराना
बन गया अतीत,
नया आएगा।

14.
स्मृति छोड़के
चुपचाप गुज़रा
साल पुराना।

15.
भोर की रश्मि
नव वर्ष को थामे
वक़्त पर आई।

16.
सन्देशा लाया-
वक़्त के साथ चलो,
नवीन वर्ष। 

17.
छुड़ाके लौटा
नए साल का हाथ
पिछला साल।

18.
याद दिलाता
वक़्त का बदलाव
नूतन वर्ष।

19.
बिछड़ गया
सुख-दुःख का साथी
पिछला साल।

20.
नूतन वर्ष,
वक़्त दोहराएगा
काल का क्रम।

-जेन्नी शबनम (1.1.2025)
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शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

705. नूतन वर्ष (10 हाइकु)

नूतन वर्ष

***

1. 
दसों दिशाएँ   
करती हैं स्वागत   
नूतन वर्ष।   

2. 
देकर दुःख   
बीता पुराना साल   
बेवफ़ा जैसे।   

3. 
आई द्वार पे   
उम्मीद की किरणें   
नया बरस।   

4. 
विस्मृत करें   
बीते साल की चालें   
मन के छाले।   

5. 
डर से भागा,   
आया जो नव वर्ष   
पुराना वर्ष।   

6. 
बीता बरस   
चला गया निर्मोही   
यादें देकर।   

7. 
याद आएगा   
सुख-दु:ख का साथी   
साल पुराना।   

8. 
वर्ष ज्यों बीता   
वक्त के पिंजड़े से   
फुर्र से उड़ा।   

9.
बड़ा सताया   
किसी को न बिसरा   
गुज़रा साल।   

10. 
आशा का दीप   
लेकर आया साल   
मन सजाओ। 

-जेन्नी शबनम (1.1.2021)
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मंगलवार, 8 जनवरी 2019

599. हे नव वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) पुस्तक- 103

हे नव वर्ष 

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1.   
हे नव वर्ष   
आख़िर आ ही गए,   
पर जल्दी क्यों?   

2.   
उम्मीद जगी-   
अच्छे दिन आएँगे   
नव वर्ष में।   

3.   
मन से करो   
इस्तक़बाल करो   
नव वर्ष का।   

4.   
पिछला साल   
भूलना नहीं कभी,   
मिली जो सीख।   

5.   
प्रेम ही प्रेम   
नव वर्ष कामना,   
सब हों सुखी।   

- जेन्नी शबनम (1. 1. 2019)
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शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

480. नूतन साल (नव वर्ष पर 7 हाइकु) पुस्तक 68,69

नूतन साल

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1. 
वक़्त सरका  
लम्हे भर को रुका   
यादें दे गया।  

2. 
फूल खिलेंगे  
तिथियों के बाग़ में   
ख़ुशबू देंगे।  

3. 
फुर्र से उड़ा 
थका पुराना साल  
नूतन आया।   

4. 
एक भी लम्हा 
हाथ में न ठहरा   
बीते साल का।  

5. 
मुझ-सा तू भी  
हो जाएगा अतीत,   
ओ नया साल।  

6. 
साल यूँ बीता 
मानो अपना कोई   
हमसे रूठा।  

7. 
हँसो या रोओ  
बीता पूरा बरस  
नए को देखो।  

- जेन्नी शबनम (1. 1. 2015)
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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

433. ये साल नया (नव वर्ष पर 6 हाइकु) पुस्तक 50

ये साल नया

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1.
सौग़ात लाया
झोली में भरकर,
ये साल नया

2.
अतीत छुपा,
नए साल का देख
पिटारा नया

3.
फिर से खिली
उम्मीदों वाली धूप,
नए साल की


4.
मधुर आभा
छन-छन के आई,
नई भोर में

5.
लिपट गई
अतीत की चादर,
बिछड़ा साल

6.
कुंडी खड़की
स्वागत में खड़ा था, 
नूतन वर्ष। 

- जेन्नी शबनम (1. 1. 2014)
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बुधवार, 18 जनवरी 2012

315. नूतन वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) पुस्तक - 21

नूतन वर्ष
(नव वर्ष पर 5 हाइकु)

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1.
नूतन वर्ष
चहुँ ओर पसरा
अपार हर्ष।

2.
फिर से आया
नया साल सुहाना
जश्न मनाओ।

3.
धूम धड़ाका
आया है नया साल
मन चहका।

4.
बीता है वर्ष
जीवन सुखकर
यादें देकर।

5.
नए साल का
करो मिलके सब
शुभ स्वागत।

- जेन्नी शबनम (28. 12. 2011)
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सोमवार, 2 जनवरी 2012

310. एक नई शुरुआत

एक नई शुरुआत

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माना कि बहुत कुछ छूट गया
एक और सपना टूट गया
पार कर लिया, तो कर लिया
उस रास्ते पर दोबारा क्यों जाना
जहाँ पाँव में छाले पड़ें, सीने में शूल चुभे
बोझिल साँसे जाने कब रुकें।  

सपने जीवन का अन्त नहीं, एक नई शुरुआत भी है
कुछ ऐसे सपने सजाओ कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे
बार-बार नहीं देखो वैसे सपने
जिनके टूटने पर ज़िन्दगी अपनी अहमियत खो दे। 

नई राह में सम्भावनाएँ हैं 
शायद एक नई दिशा मिले, जो जीवन के लिए लाज़िमी हो
जहाँ सुकून के कुछ पल हों और सपनों को मंज़िल मिले।  

- जेन्नी शबनम (1.1.2012)
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गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

111. ख़ुशबयानी कहो (अनुबन्ध/तुकान्त) / khushbayaani kaho (Anubandh/Tukaant)

ख़ुशबयानी कहो

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ख़ुशनुमा यादें आज कोई पुरानी कहो
क्षितिज में हो उत्सव बात रूहानी कहो  

सतरंगी किरणों-सी हो सबकी सुबह
दुनिया नई, सूरज की मेहरबानी कहो  

तल्ख़ वक़्त का, ज़िक्र न करो सब से
बस गुज़रे हयात की ख़ुशबयानी कहो  

क्यों दिल में हो बसाते कोई एक रब
हर मज़हब का सार दिल-ज़ुबानी कहो  

फ़िक्र फ़क़त अपनी ज़िन्दगानी का क्यों
फ़ख्र तो तब जब हर रूह इन्सानी कहो  

दर्द-ए-हिज्र की दास्ताँ न कहो 'शब'
ख़याल ही सही, वस्ल की कहानी कहो  

-जेन्नी शबनम (31. 12. 2009)
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Khushbayaani kaho

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khushnuma yaadein aaj koi puraani kaho
kshitij mein ho utsav baat ruhaani kaho.

satrangi kirnon-si ho sabki subah
duniya nayi, suraj ki meharbaani kaho.

talkh waqt ka zikrra na karo sab se
bas guzre hayaat ki khushbayaani kaho.

kyon dil mein ho basaate koi ek rab
har mazhab ka saar dil-zubaani kaho.

fikra faqat apni zindgaani ka kyun
fakhra to tab jab har rooh, insaani kaho.

dard-e-hijrr kee daastaan na kaho 'shab'
khayal hi sahi, wasl ki kahani kaho.

-Jenny Shabnam (31. 12 2009)
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मंगलवार, 20 जनवरी 2009

3. नया साल - 2009 / Naya Saal - 2009

नया साल - 2009

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भीग गई थीं पलकें, कल विदा हुआ पुराना साल
आई फिर नई उमंगें, लेकर उम्मीदें नया साल
नई तरंग, नई बहार, नई सुबह, नई रोशनी
ओस में गुँथी, नई भोर की पहली किरण सुनहरी

कल विदा हुई
हमारी कुछ अनकही कहानी 
ख़ुशनुमा यादें, कुछ लम्हें जज़्बाती
संजोग लें, जो रह गया अधूरा
आज मिला, ये नया सवेरा

पल-पल, पहर-पहर, साल-साल, युग-युग
अनवरत चलता समय का चक्र
कौन गुज़रा, कौन कुचला
कौन बसा, कौन बिखरा
अर्थहीन है, समय का विश्लेषण
असमर्थ है, प्रकृति भी
मत करो, समय का उल्लंघन
व्यर्थ है, समय के विपरीत जाने का चिन्तन

करें समर्पित, जो कुछ है अपना
भूल व्यथा, सजाएँ फिर नया सपना
कौन जाने, काल की भाषा
सब कुछ है अनजाना
कल क्या हो, कौन है जाना

मिली नई ज़िन्दगी, नई दुनिया
बढ़ लो, छू लो, थाम लो गगन
रहे न मन में, अतृप्त अभिलाषा
करो स्वागत, नए साल का
आज है, नए साल का नया सवेरा

- जेन्नी शबनम (1. 1. 2009)
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Naya Saal - 2009 

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Bhig gain theen palken, kal vida hua puraana saal
Aayee phir nayee umangein, lekar ummidein naya saal
Nayee tarang, nayee bahaar, nayee subah, nayee roshni
Oas me gunthi, nayee bhor ki pahli  kiran sunahri.

Kal vida hui, hamari kuchh ankahi kahaani
khushnuma yaaden, kuchh lamhen jazbaati
Sanjog lein, jo rah gaya adhura
Aaj mila, ye naya savera.

Pal-pal, pahar-pahar, saal-saal, yug-yug
Anwarat chalta samay ka chakra
Kaun guzra, kaun kuchla
Kaun basa, kaun bikhra
Arthheen hai, samay ka vishleshan
Asamarth hai, prakriti bhi
Mat karo, samay ka ullanghan
Vyarth hai, samay ke vipreet jaane ka chintan.

Karyen samarpit, jo kuchh hai apna
Bhool vyatha, sajaayen fir naya sapna
Kaun jaane, kaal ki bhasha
Sab kuchh hai anjana
Kal kya ho, kaun hai jana.

Mili nayee zindgi, nayee duniya
Badh lo, chhu lo, thaam lo gagan
Rahe na man mein, atript abhilasha
karo swaagat, naye saal ka
aaj hai, naye saal ka naya savera.

- Jenny Shabnam (1. 1. 2009)
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