गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

381. प्रेम का जादू (वेलेन्टाइन डे) (7 हाइकु)

प्रेम का जादू (वेलेन्टाइन डे) (7 हाइकु)

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1.
प्रेम का पाग
घीमे-धीमे पकता
जो प्रेम सच्चा.

2.
खुद में लीन
गिरता-सँभलता
प्रेम अनाड़ी.

3.
प्रेम का जादू 
सिर चढ़ के बोले
जिसको लगे.

4.
प्रेम की माला 
सब कोई जपता 
प्रेम न बूझा.

5.
प्रेम की अग्नि 
ऊँच-नीच न देखे 
मन में जले.

6.
प्रेम का काढ़ा
हर रोग की दवा 
पी लो ज़रा-सा.

7.
प्रेम बंधन 
न रस्सी न साँकल
पर अटूट.

- जेन्नी शबनम (फरवरी 14, 2013)

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20 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रेम में रचे
सुंदर हैं हाइकु
सारे के सारे ... :) :)

प्रियंका चौधरी ने कहा…

प्रेम पर अच्छी रचनाएँ।

http://yuvaam.blogspot.com/2013_01_01_archive.html?m=0

sonal ने कहा…

aaah aaj ke din si prem bhari

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .

प्यार पाने को दुनिया में तरसे सभी, प्यार पाकर के हर्षित हुए हैं सभी
प्यार से मिट गए सारे शिकबे गले ,प्यारी बातों पर हमको ऐतबार है

प्यार के गीत जब गुनगुनाओगे तुम ,उस पल खार से प्यार पाओगे तुम
प्यार दौलत से मिलता नहीं है कभी ,प्यार पर हर किसी का अधिकार है

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

प्रेम का काढ़ा
हर रोग की दवा
ज़रा-सा पी लो.

7.
प्रेम बंधन
न रस्सी न साँकल
पर अटूट.
सब मर्जो का एक दवा "प्रेम"-बिना बंधन के बंधन
Latest post हे माँ वीणा वादिनी शारदे !

सदा ने कहा…

वाह ... बेहतरीन

Jyoti khare ने कहा…

प्रेम की अग्नि
ऊँच-नीच न देखे
मन में जले.------प्रेम की सुंदर अनुभूति छोटी छोटी
कलियों के रूप में जो आपने व्यक्त की हैं,कमाल की हैं
बहुत बहुत बधाई

sushma verma ने कहा…

खुबसूरत अभिवयक्ति....

ANULATA RAJ NAIR ने कहा…

बहुत प्यारे हायकू....
अद्भुत प्रेम का जादू दिखाते....

सादर
अनु

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

इश्क़ की दास्ताँ है प्यारे ... अपनी अपनी जुबां है प्यारे - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

प्रेम बंधन
न रस्सी न साँकल
पर अटूट....

बहुत शानदार उम्दा हाइकू ,,,

recent post: बसंती रंग छा गया

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

प्रेम के रूप
वसंत का रंग,
सारे ही कुओं में घुली भंग!

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना तमाम भावनाओं को समेटे हुए..

Guzarish ने कहा…

शबनम जी अपने प्यार की शबनम यहाँ भी बरसाएँ
http://guzarish6688.blogspot.in/
कुछ हाइकू इधर भी लगाएँ

Guzarish ने कहा…

प्रणय दिन
पे प्यार की फुहार
फूलों के संग

Unknown ने कहा…

प्रेम बंधन
न रस्सी न साँकल
पर अटूट.

सवा लाख की एक बात प्रेम प्रेम और प्रेम

सहज साहित्य ने कहा…

लाजवाब है आपका यह हाइकु ऽन्य भी मर्मस्पर्शी हैं।
रेम बंधन
न रस्सी न साँकल
पर अटूट.

tbsingh ने कहा…

प्रेम बंधन
न रस्सी न साँकल
पर अटूट.sunder rachana, badhaii ho!

tbsingh ने कहा…

bahut sunder!badahaii ho !

Sarik Khan Filmcritic ने कहा…

बहुत बढि़या, प्रेम अहसास (भाव) - कुछ विचारों की पुनरावृत्ति (अहसास), जो वि-िभन्न प्रेमियों के विचारों में उभयनिष्ठ विचारों का संग्रह हैं ।