Saturday, September 20, 2014

469. सागर तीरे (30 हाइकु)

सागर तीरे 
(30 हाइकु)

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1. 
दम तोड़ती 
भटकती लहरें 
सागर तीरे । 

2. 
सफ़ेद रथ 
बढ़ता बिना पथ 
रेत में गुम । 

3. 
उमंग भरी 
लहरें मचलती  
कहर ढाती । 

4. 
लहरें दौड़ी 
शिला से टकराई  
टूटी बिखरी । 

5. 
नभ या धरा 
किसका सीना बिंधा, 
बहते आँसू । 

6.  
पाँव चूमने 
लहरें दौड़ी आई,  
मैं सकुचाई । 

7. 
टकराती हैं 
पर हारती नही 
लहरें योद्धा । 

8. 
बेचैनी बढ़ी 
चाँद पूरा जो उगा 
सागर नाचा । 

9. 
कोई न जाना, 
अच्छा किया मिटा के 
रेत पे नाम । 

10. 
फुफकारती 
पर काटती नहीं 
लहरें नाग । 

11. 
दिन व रात 
सागर जागता है,  
अनिद्रा रोगी ।  

12. 
डराता नित्य 
दहाड़ता दौड़ता 
सागर दैत्य । 

13. 
बड़ा लुभाती, 
लहरें करती ज्यों 
अठखेलियाँ । 

14.
उतर जाऊँ - 
सागर में खो जाऊँ,  
सागर सखा । 

15. 
बहती धारा 
झुमकर पुकारे 
बाँहें पसारे ।
16. 
हाहाकारती  
साहिल से मिलती 
लहरें भोली । 

17. 
किसका शाप   
क्षणिक न विश्राम  
दिन या रात । 

18. 
फन उठा के 
बेतहाशा दौड़ता 
सागर नाग । 

19. 
बेमक़सद 
दौड़ता ही रहता 
आवारा पानी । 

20. 
क्षितिज पर,  
बादल व सागर 
आलिंगनबद्ध । 

21 . 
सोचता होगा 
सागर जाने क्या-क्या 
कोई न जाने । 

22. 
सागर रोता  
सगा न सखा, कौन   
चुप कराता । 

23
कभी-कभी तो   
घबराता ही होगा 
सागर का जी । 

24.
पानी का मेला 
हर तरफ़ रेला 
है मस्तमौला । 

25. 
जल की माया 
धरा व गगन की 
समेटे काया । 

26. 
अथाह नीर 
आसमां ने बहाई 
मन की पीर । 

27. 
मिट जाएँगे 
क़दमों के निशान,  
यही जीवन । 

28. 
अद्भुत लीला - 
दूध-सी हैं लहरें 
सागर नीला । 

29.  
सूरज झाँका - 
सागर की आँखों में 
रूप सुहाना । 

30. 
सूरज लाल 
सागर में उतरा 
देखने हाल । 

- जेन्नी शबनम (20. 9. 2014)
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10 comments:

PRAN SHARMA said...

Jenny Ji , Aapke Ek - Ek Haiku NE
Apna Prabaav Chhoda Hai . Bhaavon
Ke Anuroop Bhasha Ka Istemaal Karna Aapko Khoob Aataa Hai .

Sunil Kumar said...

bahgut sundar arth samete , badhai

Digamber Naswa said...

सागर और लहरों को मथकर लाजवाब हाइकू निकाले हैं सभी ..

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-09-2014) को "जिसकी तारीफ की वो खुदा हो गया" (चर्चा मंच 1744) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Ankur Jain said...

सुंदर क्षणिकाएं..

राजीव उपाध्याय said...

आपने कुछ श्ब्दों में ही जाने कितने भाव कहे हैं इन हाइकु के माध्यम से। बहुत सुन्दर प्रस्तुति। "पाँव चूमने
लहरें दौड़ी आई,
मैं सकुचाई।" ये हाइकु बहुत अच्छी लगी।

abhishek shukla said...

Well written ma'am!!!

Asha Joglekar said...

बेमिसाल हाइकू।

anand murthy said...

bahoot khoob ....

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संजय भास्‍कर said...

सुंदर क्षणिकाएं