Friday, September 5, 2014

468. जीवन-बोध (शिक्षक दिवस पर 10 हाइकु)

जीवन-बोध 
(शिक्षक दिवस पर 10 हाइकु)

1.
गुरु से सीखा 
बिन अँगुली थामे  
जीवन-बोध ! 

2.
बढ़ता तरु,  
माँ है प्रथम गुरु  
पाकर ज्ञान !  
3.
करता मन  
शत-शत नमन  
गुरु आपको ! 

4.
खिले आखर   
भरा जीवन-रंग 
जो था बेरंग !  

5.
भरते मान  
पाते हैं अपमान, 
कैसा ये युग ?  

6. 
खुद से सीखा  
अनुभवों का पाठ  
जीवन गुरु ! 

7.
भाषा व बोली 
पास, पर समझ   
गुरु से पाई !  

8.
ज्ञान का तेज  
चहुँ ओर बिखेरता  
गुरु दीपक !  

9.
प्रेरणा-पुष्प  
जीवन में खिलाते  
गुरु प्रेरक !  

10.
पसारा ज्ञान  
दूर भागा अज्ञान  
सद्गुणी गुरु ! 

- जेन्नी शबनम (5. 9. 2014)

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11 comments:

सहज साहित्य said...

सभी हाइकु बहुत प्रभावशाली और सामयिक हैं ।बहुत बधाई!

सदा said...

सभी हाइकु ... सशक्‍त भावों को व्‍यक्‍त कर रहे हैं

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत उम्दा।
--
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

abhishek shukla said...

sundar

Digamber Naswa said...

लाजवाब सामयिक हाइकू ...
बधाई गुरु दिवस की ...

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत सुन्दर हायकू डॉ जेन्नी शबनम जी |आपका आभार

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और सारगर्भित हाइकु...

Asha Joglekar said...

शिक्षक दिवस पर सुंदर गुरु हाइकू।

Onkar said...

बहुत बढ़िया

Sanju said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई मेरी

नई पोस्ट
पर भी पधारेँ।

राज चौहान said...

सुन्दर और सारगर्भित हाइकु
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

राज चौहान
http://rajkumarchuhan.blogspot.in