रविवार, 20 अप्रैल 2014

451. मतलब...

मतलब...

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छोटे-छोटे दुःख सुनना
न मुझे पसंद है न तुम्हें  
यूँ कभी तुमने भी मना नहीं किया कि न बताऊँ 
पर जिस अनमने भाव से सब सुनते हो 
समझ आ जाता है कि तुमको पसंद नहीं आ रहा 
हमारे बीच ऐसा अनऔपचारिक रिश्ता है कि
हम कुछ भी किसी को बताने से मना नहीं करते 
परन्तु 
सिर्फ कहने भर को कहते हैं 
सुनने भर को सुनते हैं
न जानना चाहते हैं 
न समझना चाहते हैं    
हम कोई मतलब नहीं रखते
एक दूसरे के 
सुख से 
दुःख से 
ज़िंदगी से 
फितरत से 
बस एक कोई गाँठ है 
जो जोड़े हुए है 
जो टूटती नहीं 
शायद 
इस लिए हम जुड़े हुए हैं 
अपना-अपना मतलब साध रहे हैं !

- जेन्नी शबनम (20. 4. 2014)

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12 टिप्‍पणियां:

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

कहीं से जुड़े हैं इसलिये निभाए जा रहे हैं-और करें भी क्या !

PRAN SHARMA ने कहा…

Seedhe - saade shabdon mein gahree
baat kee abhivakti ke liye aapko
badhaae . khoob kahaa hai aapne -

Bas ek gaanth hai
jo jode huye hai
jo toottee nahin
shaayad
isliye hum jude huye hain
apna - apna matlab saadh rahe hain

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (21-04-2014) को "गल्तियों से आपके पाठक रूठ जायेंगे" (चर्चा मंच-1589) पर भी है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

अभिषेक कुमार अभी ने कहा…

बहुत सुन्दर

एक नज़र :- हालात-ए-बयाँ: ''इंसानियत''

Digamber Naswa ने कहा…

कई बार इस गाँठ को तोडना मुश्किल होता है ... पर नियति को बदलना भी तो आसान नहीं होता .. भावपूर्ण रचना ...

dr.mahendrag ने कहा…

बस एक कोई गाँठ है
जो जोड़े हुए है
जो टूटती नहीं
मतलब की हम एक दूजे को अपने सर पर ढो रहें हैं , यह भी भारतीयता की बड़ी पहचान है .... और सफर यूँ ही पूरा हो जाता है सुन्दर

Kailash Sharma ने कहा…

शायद यही आज के रिश्तों का सच है...बहुत सुन्दर और भावपूर्ण..

Satish Saxena ने कहा…

निबाह ही जीवन हो गया है !! मंगलकामनाएं आपको !

shorya Malik ने कहा…

एक अनदेखी सी गॉंठ है, जो सबको जोड़ती है

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह जिंदगी का इतना बड़ा सच कितनी सरलता से लिख दिया....बहुत खूब दीदी

vibha rani Shrivastava ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ......

prritiy----sneh ने कहा…

sach hai kuchh rishte bandh jate hain par unmein ham apna dil khol kar nhi rakh paate. achhi rachna

shubhkamnayen