Thursday, July 21, 2016

519. भरोसा...

भरोसा...

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ढ़ेरों तकनीक है
भरोसा जताने
और भरोसा तोड़ने की
सारी की सारी 
इस्तेमाल में लाई जाती है 
पर
भरोसा जताने या
तोड़ने के लिए
लाज़िमी है कि
भरोसा हो ।

- जेन्नी शबनम (21. 7. 2016)

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3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (23-07-2016) को "आतंक के कैंसर में जकड़ी दुनिया" (चर्चा अंक-2412) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Onkar said...

सही कहा

Digamber Naswa said...

सच कहा है वर्ना बेमानी हैं सब बातें ...