Thursday, July 28, 2016

520. अजब ये दुनिया (चोका)

अजब ये दुनिया (चोका)  

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यह दुनिया  
ज्यों अजायबघर  
अनोखे दृश्य  
अद्भुत संकलन  
विस्मयकारी  
देख होते हत्प्रभ !  
अजब रीत  
इस दुनिया की है  
माटी की मूर्ति  
देवियाँ पूजनीय  
निरपराध  
बेटियाँ हैं जलती  
जो है जननी  
दुनिया ये रचती !  
कहीं क्रंदन  
कहीं गूँजती हँसी  
कोई यतीम  
कोई है खुशहाल  
कहीं महल  
कहीं धरा बिछौना  
बड़ी निराली  
गज़ब ये दुनिया !  
भूख से मृत्यु  
वेदना है अपार  
भरा भण्डार  
संपत्ति बेशुमार  
पर अभागा  
कोई नहीं अपना  
सब बेकार !  
धरती में दरार  
सूखे की मार  
बहा ले गया सब  
तूफानी जल  
अपनी आग में ही  
जला सूरज  
अपनी रौशनी से  
नहाया चाँद  
हवा है बहकती  
आँखें मूँदती  
दुनिया चमत्कार  
रूप-संसार !  
हम इंसानों की है  
कारगुजारी  
हरे-घने जंगल  
हुए लाचार  
कट गए जो पेड़,  
हुए उघार  
चिड़िया बेआसरा  
पानी भी प्यासा  
चेत जाओ मानव !  
वरना नष्ट  
हो जाएगी दुनिया  
मिट जाएगी  
अजब ये दुनिया  
गजब ये दुनिया !  

- जेन्नी शबनम (28. 7. 2016)  

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6 comments:

Asha Joglekar said...

चेत जाओ मानव !
वरना नष्ट
हो जाएगी दुनिया
मिट जाएगी
अजब ये दुनिया
गजब ये दुनिया !

बिलकुल सही कहा। पर मानव है कि चेतता ही नही......

yashoda Agrawal said...

वाह...
आनन्दित हई पढ़कर
बेहतरीन रचना
सादर

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (30-07-2016) को "ख़ुशी से झूमो-गाओ" (चर्चा अंक-2419) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

विरम सिंह said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 31 जुलाई 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Onkar said...

सुन्दर प्रस्तुति

Harash Mahajan said...

सुंदर !! अति सुंदर !!