Friday, October 23, 2009

89. शब को दूर जाने दो / shab ko door jaane do

शब को दूर जाने दो...

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ज़िन्दगी को टूट जाने दो, कलम भी छूट जाने दो
उसको जाने का बहाना चाहिए, रूठा है रूठ जाने दो 

साझे एहसासों से बना था, कल मन का एक घरौंदा
अब कहता है मुझको, तसव्वुर से भी दूर जाने दो 

दस्तूर मालुम है उसे भी, उम्र की नादानियों की
फ़ासले उम्र के हों या मन के, भ्रम टूट जाने दो 

जितनी मोहब्बत की उसने, उतनी ही नफ़रत भी
कब किसका पलड़ा भारी, अब मुझे भूल जाने दो 

शिकवा बहुत किया है ज़िन्दगी से, अब न करेंगे
गम और मिले इससे पहले, ज़िन्दगी छूट जाने दो 

ख्वाहिशें तो मिटी नहीं कभी, जिन्हें पाला हमने वर्षों
थम सी गई है ज़िन्दगी, अब साँसों को टूट जाने दो 

रूह से नाता जोड़ कर, जन्म दिए हम एक संतान देव
तुम्हें सौंपती हूँ उस अनाथ को, 'शब' को दूर जाने दो 

- जेन्नी शबनम (अक्टूबर 22, 2009)

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shab ko door jaane do...

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zindgi ko toot jaane do, kalam bhi chhoot jaane do
usko jaane ka bahaana chaahiye, rootha hai rooth jaane do.

saanjhe ehsaason se banaa thaa, kal mann ka gharaunda
ab kahtaa hai mujhko, tasauur se bhi door jaane do.

dastoor maaloom hai use bhi, umra kee naadaaniyon kee
faasle umra ke hon ya mann ke, bhrum toot jaane do.

jitnee mohabbat kee usne, utnee hi nafrat bhi
kab kiska paldaa bhaari, ab mujhe bhool jaane do.

shikwa bahut kiya hai zindagi se, ab na karenge
gham aur mile isase pahle, zindagi chhoot jaane do.

khwaahishen to kabhi mitee nahee, jinhein paalaa humne warshon
tham see gayee hai zindagi, ab saanson ko toot jaane do.

rooh se naata jod kar, janm diye hum ek santaan dev
tumhein saunptee us anaath ko, 'shab' ko door jaane do.

- Jenny Shabnam (October २२, 2009)

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3 comments:

रश्मि प्रभा... said...

ख्वाहिशें तो मिटी नहीं कभी, जिन्हें पाले हम वर्षों,
थम सी गई है ज़िन्दगी, अब साँसों को टूट जाने दो !
kitni khamosh vyatha hai,sisakti si aahen in ehsaason me,
bahut hi larajta khyaal

Dr. Amarjeet Kaunke said...

जितनी मोहब्बत की उसने, उतनी हीं नफ़रत भी,
कब किसका पलड़ा भारी, अब मुझे भूल जाने दो !
bahut hi pyara ahsaas hai darasal pyar aur nafrat ek hi sikke ke do pahlu hain.....

GAUTAM SACHDEV said...

शिकवा बहुत किया है ज़िन्दगी से, अब न करेंगे,
गम और मिले इससे पहले, ज़िन्दगी छूट जाने दो
जेन्नी जी शब्दों से जीवन के जिस पहलुओं कों आप बुनती है ,उसे देखकर ही मन उद्देव्लित हो उठता है वाकई बहुत ही सधी रचना है आपकी| बहुत खूब मेरे अंतर्मन कों झंकझोर गयी |
आपका अनुसरणकर्ता
सचदेव