Monday, May 2, 2011

ज़िन्दगी ऐसी ही होती है...

ज़िन्दगी ऐसी ही होती है...

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सुनसान राहों से गुजरते हुए
ज़िन्दगी ख़ामोश हो गई है
कविता भी अब मौन हो गई है,
शब्द तो बहुत उपजते हैं
और यूँ ही विलीन हो जाते हैं
बिना कहे शब्द भी खो जाते हैं,
मेरे शब्द चुप हो रहे हैं
और एक चुप्पी मुझमें भी उग रही है
कविता जन्म लेने से पहले मर रही है,
किसे ढूंढ़ कर कहूँ कि साथ चलो
मेरी अनकही सुन लो
न सुनो मेरे लिए कुछ तो कह दो,
सफ़र की वीरानगी जब दिल में उतर जाती है
मानो कि बहुत चले मगर
ज़िन्दगी वहीं ठहरी होती है
अब जाना कि ज़िन्दगी ऐसी ही होती है|

- जेन्नी शबनम (2. 5. 2011)

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12 comments:

SAJAN.AAWARA said...

SHAYAD JINDGI ESI HI HOTI HAI.. . . . . . MAM NICE POEM. . , . . . . JAI HIND JAI BHARAT

mridula pradhan said...

किसे ढूंढ़ कर कहूँ कि साथ चलो
मेरी अनकही सुन लो
man ke ekdam kareeb.....

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर भावना पूर्ण रचना| धन्यवाद|

network said...

जेन्नी जी ,बेस्ट लाइंस "मेरे शब्द चुप हो रहे हैं
और एक चुप्पी मुझमें भी उग रही है "हमेशा गंभीर ही मत लिखा करिए ,हम जैसे बेवकूफों को देर में समझ में आता है |

वीना said...

बहुत सुंदर शब्दों के साथ सुंदर रचना...

वीना said...

रुके-रुके से कदम रिक के बार-बार चले..
जिंदगी ऐसी ही होती है
बहुत अच्छी....

रजनीश तिवारी said...

रुकी-रुकी सी ज़िंदगी । सुंदर रचना .. शुभकामनाएँ ।

सहज साहित्य said...

सचमुच ज़िन्दगी ऐसी ही होती है,मौन ओढ़े हुए , शब्दों का गुम हो जाना,चुप्पी का उगना जैसे प्रयोग कविता के निहितार्थ को सतह से उठाकर बहुत गहरे तक ले जाते हैं। अगर आदमी मन की बात कह लिया करता तो बहुत से तनाव होते ही नहीं, साथ ही साथ यह भी सच है कि अच्छी अभिव्यक्ति भी दुर्लभ हो जाती । आपकी यह कविता बहुत गहरी बात कह जाती है -कविता भी अब मौन हो गई है,
शब्द तो बहुत उपजते हैं
और यूँ हीं विलीन हो जाते हैं
बिना कहे शब्द भी खो जाते हैं,
मेरे शब्द चुप हो रहे हैं
और एक चुप्पी मुझमें भी उग रही है

PRAN SHARMA said...

SEEDHE - SAADE SHABDON MEIN
SEEDHE - SAADE BHAAV ACHCHHE
LAGE HAIN . SUNDAR KAVYABHIVYAKTI
HAI. BADHAAEE .

***Punam*** said...

"शब्द तो बहुत उपजते हैं
और यूँ हीं विलीन हो जाते हैं
बिना कहे शब्द भी खो जाते हैं,
मेरे शब्द चुप हो रहे हैं"


सुन्दर अभिव्यक्ति..!!

sushma 'आहुति' said...

such sayad jindgi aishi hi hoti hai... bhut sunder...

निर्झर'नीर said...

zindgi ..kaisi hai paheli ???????


exceelent creation

ye rachna bahut acchi lagi aapki