Wednesday, July 6, 2011

ज़िन्दगी मौका नहीं देती...

ज़िन्दगी मौका नहीं देती...

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खौफ़ के साये में
ज़िन्दगी को तलाशती हूँ,
ढेरों सवाल हैं
पर जवाब नहीं|
हर पल, हर लम्हा
एक इम्तहान से गुजरती हूँ,
ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती
कमबख्त, ये ज़िन्दगी मौका नहीं देती|

- जेन्नी शबनम (जनवरी 24, 2009)

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19 comments:

kshama said...

Haan! Sach hee to hai! Zindagee aksar hee mauqa nahee detee!

Rachana said...

jeevan aesa hi hai .hum dhundhte rahjate hain.aur vo chhupti rahti hai
rachana

रश्मि प्रभा... said...

zindagi mauka deti hai- kabhi kabhi...

सहज साहित्य said...

ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती
कमबख्त, ये जिंदगी मौका नहीं देती|
इन पंक्तियों में जो आकुलता है , यही जीवन है । ख्वाहिशे ही आदमी को ज़िन्दा रखती हैं । बहुत सुन्दर !

mridula pradhan said...

ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती
कमबख्त, ये जिंदगी मौका नहीं देती|
kitna kuch kah diya......wo bhi itni sunderta ke saath.

sushma 'आहुति' said...

bilkul sahi kaha apne jindgi mauka nhi deti... bhut hi bhaavpur panktiya...

फणि राज मणि चन्दन said...

ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती
कमबख्त, ये जिंदगी मौका नहीं देती|

sach hai!!

aabhar
Fani Raj

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

रविकर said...

हर पल, हर लम्हा
एक इम्तहान से गुजरती हूँ,

बहुत सुन्दर ||
आभार ||

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut hee khoobsurat hai...mauka milegaa!!

सदा said...

ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती

बेहतरीन ..।

Pappu Parihar said...

मानिन्द सी जिन्दगी है, इक बार तो मिल जा |
जाना है अब जहां से, इक बार तो मिल जा |

वन्दना said...

ख्वाहिशें इतनी कि पूरी नहीं होती
कमबख्त, ये जिंदगी मौका नहीं देती|

वाह क्या बात कह दी।

वाणी गीत said...

हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर दम निकले !
यही तो कहा आपने भी ...
बेहतरीन !

mahendra srivastava said...

क्या बात है, बहुत बढिया।

veerubhai said...

ज़िन्दगी मौक़ा नहीं देती -
सुन्दर रचना .
बिना एहसास के जी रहा हूँ ,
इसलिए की जब कभी एहसास लौटें ,
खैर मकदम कर सकूं .

Richa said...

I LIKE THIS POST ..

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' said...

वाकई ये ज़िन्दगी मौका नही देती...बहुत सुन्दर

अनामिका की सदायें ...... said...

sachaayi ko uker diya thode shabdo me.