Friday, April 6, 2012

338. फूल कुमारी उदास है...

फूल कुमारी उदास है...

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एक था राजा एक थी रानी
उसकी बेटी थी फूल कुमारी
फूल कुमारी जब उदास होती...
पढ़ते सुनते
बरस बीत गए
कहानी में
फूल कुमारी उदास होती है
और फिर उसकी हँसी लौट आती है,
सच की दुनिया में
फूल कुमारी की उदासी
आज भी कायम है
कोई नहीं आता जो उसकी हँसी लौटाए,
कहानी की फूल कुमारी को हँसाने के लिए
समस्त प्रदेश तत्पर है
फूल कुमारी की हँसी में देश की हँसी शामिल है
फूल कुमारी की उदासी से
पेड़ पौधे भी उदास हो जाते हैं
जीव-जंतु भी
और समस्त प्रजा भी,
वक़्त ने करवट ली
दुनिया बदल गई
हंसाने वाले रोबोट आ गए
पर एक वो मसखरा न आया
जो उस फूलकुमारी की तरह हँसा जाए,
कहानी वाला मसखरा
क्यों जन्म नहीं लेता?
आखिर कब तक फूल कुमारी उदास रहेगी
कब तक राजा रानी
अपनी फूलकुमारी के लिए उदास रहेंगे,
अब की फूलकुमारी
उदास होती है तो
कोई और दुखी नहीं होता
न कोई हँसाने की चेष्टा करता है,
सच है
कहानी सिर्फ पढ़ने के लिए होती है
जीवन में नहीं उतरती
कहानी कहानी है
जिंदगी जिंदगी !
कहानी की फूलकुमारी
खूबसूरत अल्फ़ाज़ से गढ़ी गई थी
जिसके जीवन की घटनाएं
मन माफिक मोड़ लेती है,
सांस लेती हाड़ मांस की फूलकुमारी
जिसके लिए पूर्व निर्धारित मानदंड हैं
जिसके वश में न हँसना है न उदास होना
न उम्मीद रखना
उसकी उदासी की परवाह कोई नहीं करता,
फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !

- जेन्नी शबनम (अप्रैल 2, 2012)

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27 comments:

रविकर फैजाबादी said...

हार्दिक शुभकामनायें!

expression said...

वाह जेन्नी जी........

कहानी सिर्फ पढ़ने के लिए होती है
जीवन में नहीं उतरती
कहानी कहानी है
जिंदगी जिंदगी !

एकदम सच कहा.....मगर मानने को जी नहीं चाहता.....उम्मीद है कि हँसेगी ज़रूर राजकुमारी
:-)

सस्नेह
अनु

kshama said...

उसकी उदासी की परवाह कोई नहीं करता,
फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !
Kitna sahee kaha aapne! Jaise mere moohse alfaaz chheen liye!

Anupama Tripathi said...

सकल वेदना से घिरी उदास जिंदगी ....
पर यकीन मानिये उदासी के बाद खुशिज़रूर आएगी ....
फूलकुमारी ज़रूर हँसेगी ....
शुभकामनायें ...

संजय भास्कर said...

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

रश्मि प्रभा... said...

कौन लौटाएगा उदासी ? राजकुमार हो तब न !!!

dheerendra said...

बहुत सुंदर अच्छी प्रस्तुति........

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

Deewan-e-Alok said...

Udas thi.. Udas hain....


Apne Udas rahegi nahi likha...

to asha kar sakte hain... ki fool kumaari hamesha udaas nahi rahegi...

uske khush hone ki umeed baaki hain....


behad acchi rachna...

Dasarath Singh said...

फूल कुमारी उदास होती है
और फिर उसकी हँसी लौट आती है,
बहुत सुंदर प्रस्तुति..

Ramakant Singh said...

फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !
aapne jindagi ko karib se mahasus
kiya hai .aapake kathopakathan ka andaz dil ko chhu gaya .koi badhai nahin ISHWAR aapako shatayu rakhen aur aap bas aise hi likhati rahen

नीरज गोस्वामी said...

सच है
कहानी सिर्फ पढ़ने के लिए होती है
जीवन में नहीं उतरती
कहानी कहानी है
जिंदगी जिंदगी !

वाह..कितनी गहरी बात की है आपने इस रचना के माध्यम से...बधाई

नीरज

Naveen Mani Tripathi said...

सांस लेती हाड़ मांस की फूलकुमारी
जिसके लिए पूर्व निर्धारित मानदंड हैं
जिसके वश में न हँसना है न उदास होना
न उम्मीद रखना

ummeedon pe duniya kayam hai Foolkumari ke din jaroor vapas ayenge.....bs bhagwan ke ghr der hai andher nahi hai.....samay ke sath sb kuchh badal raha hai

khoobsoorat rachana ke liye hardik badhai Shabnam ji.

Saras said...

फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !
तब फुलकुमारी एक मसखरे की हरकतों से खुश हो जाती थी
लेकिन वक़्त के साथ ...जीवन में इतनी तल्खी आ गयी .....की उसकी मुस्कराहट छिन गयी ..लेकिन फिर भी ... उम्मीद नहीं टूटी .....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

दो-तीन दिनों तक नेट से बाहर रहा! एक मित्र के घर जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन मंगलवार को फिर देहरादून जाना है। इसलिए अभी सभी के यहाँ जाकर कमेंट करना सम्भव नहीं होगा। आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Udan Tashtari said...

बहुत भावपूर्ण रचना....फूल कुमारी उदास........

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कहानी सिर्फ पढ़ने के लिए होती है
जीवन में नहीं उतरती
कहानी कहानी है
जिंदगी जिंदगी !

एकदम सच्ची पंक्तियाँ।

सादर

दिगम्बर नासवा said...

सच के करीब है आपकी भावाव्यक्ति ...
पर राजकुमारी जरूर हँसेगी इक दिन ...

Kailash Sharma said...

कहानी जीवन से बहुत दूर है...बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...

सहज साहित्य said...

'फूल कुमारी उदास है' आपने अपनी इस कविता में फूलकुमारी के प्रतीकात्मक अर्थ का बहुत खूबसूरती से निर्वाह किया है। यदि मानव के पास यह दिल का ठींकरा न होता तो उदासी का भी कोई अवसर नहीं मिलता । मन है कि ज़रा -सी बात सारी खुशी काफ़ूर कर देती है। गोपाल दास नीरज जी ने अपने एक गीत में बहुत अच्ची बातकही है-
'' मन तो मौसम -सा चंचल है
सबका होकर भी न किसी का
कभी सुबह का कभी शाम का
कभी रुदन का कभी हँसी का ।"
अच्छी कविता पढ़ने के लिए 'लम्हों का सफ़र' पढ़ना ज़रूरी हो जाता है । आपकी इन पंक्तियों का तो कोई जवाब नहीं है -
सच है
कहानी सिर्फ पढ़ने के लिए होती है
जीवन में नहीं उतरती
कहानी कहानी है
जिंदगी जिंदगी !
कहानी की फूलकुमारी
खूबसूरत अल्फ़ाज़ से गढ़ी गई थी
जिसके जीवन की घटनाएं
मन माफिक मोड़ लेती है,
सांस लेती हाड़ मांस की फूलकुमारी
जिसके लिए पूर्व निर्धारित मानदंड हैं
जिसके वश में न हँसना है न उदास होना
न उम्मीद रखना
उसकी उदासी की परवाह कोई नहीं करता,
फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !

-ईश्वर से दुआ है कि आपकी यह कलम सदा इसी तरह काव्य मुक्ता बाँटती रहे ।

प्रेम सरोवर said...

बहुत भावपूर्ण रचना। धन्यवाद ।

dinesh aggarwal said...

कहानी की फूलकुमारी
खूबसूरत अल्फ़ाज़ों से गढ़ी गई थी
जिसके जीवन की घटनाएं
मन माफिक मोड़ लेती है,
सांस लेती हाड़ मांस की फूलकुमारी
जिसके लिए पूर्व निर्धारित मानदंड हैं
जिसके वश में न हँसना है न उदास होना
न उम्मीद रखना
उसकी उदासी की परवाह कोई नहीं करता,
फूल कुमारी उदास थी
फूल कुमारी उदास है !
बहुत ही सुन्दर.....

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अच्छी प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत बधाई....

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत ही सुंदर कविता |जेन्नी जी ब्लॉग पर आकर उत्साहवर्धन करने हेतु आभार |

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत ही सुंदर कविता |अच्छी प्रस्तुति

Rajput said...

सांस लेती हाड़ मांस की फूलकुमारी
जिसके लिए पूर्व निर्धारित मानदंड हैं....
खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

Maheshwari kaneri said...

जेन्नी जी...... वो दिन जरुर आएगा जब राजकुमारी .हँसेगी ....सुन्दर रचना...

sushila said...

फूलकुमारी तब भी हँसी थी फूलकुमारी अब भी हँसेगी। प्रतीक्षा कीजिए।
सुंदर अभिव्यक्‍ति !