Tuesday, July 1, 2014

460. स्मृतियाँ शूल (10 हाइकु)

स्मृतियाँ शूल 
(10 हाइकु)

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1.
तय हुआ है -
मौसम बदलेगा
बर्फ जलेगा ।

2.
ले कर चली
चींटियों की क़तार
मीठा पहाड़ ।

3.
तमाम रात
धकेलती ही रही
यादों की गाड़ी ।

4.
आँखें मींचती
सूर्य के गले लगी
धरा जो जागी ।

5.
जाने क्या सोचे
यायावर-सा फिरे
बादल जोगी ।

6.
डरे होते हैं -
बेघर न हो जाएँ 
मेरे सपने  

7.
हार या जीत 
बेनाम-सी उम्मीद 
ज़मींदोज़ क्यों !

8.
ख़ारिज हुई 
जब भी भेजी अर्जी 
अल्लाह की मर्ज़ी !

9.
जश्न मनाता 
सूरज निकलता 
हो कोई ऋतु !

10.
जब उभरें  
लहुलूहान करें 
स्मृतियाँ शूल !

- जेन्नी शबनम (5. 6. 2014)

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8 comments:

Shalini Kaushik said...

हार या जीत
बेनाम-सी उम्मीद
ज़मींदोज़ क्यों !
bahut sundar jenni shabnam ji

प्रतिभा सक्सेना said...

लघु कलेवर ,बड़ी बात !

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 03-07-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1663 में दिया गया है
आभार

Digamber Naswa said...

डरे होते हैं -
बेघर न हो जाएँ
मेरे सपने ..
सपने बेघर नहीं होते .. आँखों में पलते हैं ये ... सभी हाइकू लाजवाब ...

आशीष भाई said...

बहुत ही सुंदर , जेन्नी जी धन्यवाद !
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रश्मि शर्मा said...

सभी हाइकु बेहद पसंद आए....

हिमकर श्याम said...

बहुत सुंदर और भावपूर्ण हाइकु...बधाई

Onkar said...

अच्छे हाइकु