Friday, June 27, 2014

459. कैनवस...

कैनवस...

*******

एक कैनवस कोरा सा   
जिसपे भरे मैंने  
अरमानों के रंग  
पिरो दिए  
अपनी कामनाओं के बूटे  
रोप दिए  
अपनी ख्वाहिशों के पंख  
और चाहा कि  
जी लूँ अपनी सारी हसरतों को  
उस कैनवस में घुसकर  
आज वर्षों बाद  
वही कैनवस  
रंगों से भरा हुआ   
उमंगों से सजा हुआ   
चहक रहा था  
उसके रंगों में   
एक नया रंग भी दमक रहा था   
मेरे भरे हुए रंगों से  
एक नया रंग पनप गया था     
वह कैनवस 
आज
अपने मन माफिक रंगों से खिल रहा था   
उसमें दिख रहे थे मेरे सपने  
उसके पंख अब कोमल नहीं थे    
उम्र और समझ की कठोरता थी उनमें    
आकाश को पाने और ज़मीन को नापने का
हुनर था उनमें   
आज
यही जी चाहता है   
वह कैनवस  
मेरे सपनों के रंग को बसा रहने दे  
और भर ले   
अपने सपनों के रंग   
चटख-चटख  
प्यारे-प्यारे  
गुलमोहर-से   
जो अडिग रहते पतझड़ में   
मढ़ ले कुछ ऐसे नक्षत्र  
जो हर मौसम में उसे ऊर्जा दे  
गढ़ ले ऐसे शब्द   
जो भावनाओं की धूप से दमकता रहे  
बसा ले धरा और क्षितिज को  
अपनी आत्मा में  
और  
सफलताओं के उत्सव में   
आजीवन खिलता रहे  
आज  
चाहती हूँ  
कहूँ उस कैनवस से 
तमाम कुशलता से रँग ले  
अपने सपनों का         
कैनवस !  

- जेन्नी शबनम (22 जून 2014)
( अपने पुत्र अभिज्ञान सिद्धांत के 21 वें जन्मदिन पर)
_____________________________________

13 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

प्रियवर सिद्धान्त को शुभाशीष और
आपको शुभकामनाएँ।
सिद्धान्त बेटा मेरी ओर से
जन्मदिन की बधायी स्वीकार कीजिए।
--
आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-06-2014) को "ये कौन बोल रहा है ख़ुदा के लहजे में... " (चर्चा मंच 1658) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

Anupama Tripathi said...

बहुत सुंदर भाव ...मेरी शुभकामनायें ....!!

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया

सुशील कुमार जोशी said...

अभिज्ञान के 21वें जन्मदिन पर उसे ढेरों शुभकामनाऐं । बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।

कालीपद प्रसाद said...

पुत्र के जन्मदिन की बधाई !
उम्मीदों की डोली !

आशीष भाई said...

बहुत ही सुंदर लेखन और बढ़िया विचार , आ. जेन्नी जी धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

सहज साहित्य said...

कैनवास के माध्यम से आपने जीवन के सौन्दर्य और उसके महत्त्व को प्रतिपादित किया है। आपकी इस कविता का प्रबाह बहुत प्रभावित करता ।

आशा जोगळेकर said...

वह कैनवस भर ले अपने भी सपनों के रंग मेरे सपनों के रंगों के साथ।
आमीन।

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...शुभकामनायें!

Neeraj Kumar Neer said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. मेरी कामना है कि कैनवास हमेशा विविध रंगों से सराबोर रहे ...

Satish Saxena said...

मंगलकामनाएं !!

Digamber Naswa said...

सुन्दर रंग जीवन में यूँ ही महकते रहें ...
बेटे को जनम दिन की शुभमनाएं ...

हिमकर श्याम said...

बहुत ही सुंदर और प्रवाहमयी रचना. मेरी ओर से भी हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएँ...