Monday, September 1, 2014

466. घर आ जा न ! (बारिश के 8 हाइकु)

घर आ जा न ! 
(बारिश के 8 हाइकु)

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1.
बरसा नहीं 
भटक-भटक के 
थका बादल ! 

2.
घूँघट काढ़े  
घटा में छुप कर  
सूर्य शर्माए ! 

3.
बादल फटा 
रुष्ट इंद्र देवता 
खेत सुलगा ! 

4.
घूमने चले 
बादलों के रथ पे 
सूर्य देवता ! 

5.
अम्बर रोया 
दूब भीगती रही 
उफ़ न बोली ! 

6.
गुर्राता मेघ 
कड़कता ही रहा 
नहीं बरसा ! 

7.
प्रभाती गाता 
मंत्र गुनगुनाता 
मौसम आता । 

8.
पानी-पानी रे  
क्यों बना तू जोगी रे  
घर आ जा न ! 

- जेन्नी शबनम (3. 7. 2014) 

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8 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत ही सुन्दर हाइकू...

yashoda agrawal said...

आपकी लिखी रचना बुधवार 03 सितम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुंदर हाईकू ।

Dr.NISHA MAHARANA said...

sundar lage sare ....

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर हाइकु...

Asha Joglekar said...

कभी कहर बरपाती कभी रूठ कर दूर जाती
क्यूं रे बारिश,
सुन भी ले हमारी गुजारिश ।

बारिश न आने के भी हाइकू पर सुंदर।

Digamber Naswa said...

लाजवाब हाइकू हैं सभी ... बरखा का एहसास लिए ...

Smita Singh said...

लाजवाब हाइकू