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मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

784. सूरज किसका चाँद किसका

सूरज किसका चाँद किसका 

***

हम चाँद हैं तुम्हारे  
तुम सूरज हो हमारे 
हम भी तनहा, तुम भी तनहा 
संसार में हम दोनों तनहा 
पर साथ-साथ हम चलते हैं
अपना कर्त्तव्य निभाते हैं। 

सारे दिन जलकर
जब तुम सोने जाते हो
तुमसे लेकर उजाला
हम देते हैं जग को उजाला
बस एक रात होती है
हमारे मिलन की रात
वह है अमावस की रात
हाँ! यह भी बहुत है
हमारे अनन्त जीवन में
हर माह होती है हमारी रात। 

कभी-कभी मन सोचता है
मिली ऐसी ज़िन्दगी क्यों
पिया हमने अमृत क्यों
युगों-युगों से चलते हुए
हर रोज़ जलते हुए
क्या पाएँगे हम
कब तक यूँ जलेंगे हम
उफ़ ये क्या कर लिया हमने
अमरत्व का वरदान
अब लगता है अभिशाप। 

हम दोनों अपने पथ पर
बिना थके चलते दम भर
करते रहे कर्त्तव्य का पालन
नहीं किया कोई उल्लंघन
पर जग की रीत देखकर
मन चाहता छोड़ दें सब बन्धन। 
 
कोई कहता सूरज है उसका
कोई कहता चाँद है उसका
नहीं पूछता कोई हमसे
क्या इच्छा है हमारे मन में
युगों-युगों से हम साथ रहे
युगों-युगों तक यों ही रहेंगे
मन दुखता है सुनकर
जग हँसता जब हमें बाँटकर। 

अब चाहते आ जाए प्रलय
जग में नहीं रहा कोई लय
या मिल जाए विष कहीं
या उगल दें अमृत सभी
कर विषपान हम करें विश्राम
या अमरत्व का मिटे विधान। 

सूरज बिना मिट जाएगी दुनिया
अँधेरे में कब तक टिकेगी दुनिया
फिर बाँटते रहना जगवालों
सूरज था किसका
चाँद था किसका।

-जेन्नी शबनम (24.12.2024)
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शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

633. चाँद (चाँद पर 10 हाइकु) पुस्तक 111,112

चाँद 

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1.   
बिछ जो गई   
रोशनी की चादर   
चाँद है खुश।   

2.   
सबका प्यारा   
कई रिश्तों में दिखा   
दुलारा चाँद।   

3.   
सह न सका   
सूरज की तपिश   
चाँद जा छुपा।   

4.   
धुँधला दिखा   
प्रदूषण से हारा   
पूर्णिमा चाँद।   

5.   
चंदा ओ चंदा   
घर का संदेशा ला   
याद सताती।   

6.   
रौशन जहाँ   
शबाब पर चाँद   
पूनम रात।   

7.   
चाँदनी गिरी   
अमृत है बरसा   
पूर्णिमा रात।   

8.   
पूनो की रात   
चंदा ने ख़ूब की है    
अमृत वर्षा।   

9.   
मुख मलिन   
प्रकाश प्रदूषण   
तन्हा है चाँद।   

10.   
दिख न पाया   
बिजली भरमार   
चाँद का मुख।   

- जेन्नी शबनम (18. 10. 2019)   
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गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

450. चाँद-चाँदनी (चाँद पर 7 हाइकु) पुस्तक 53,54

चाँद-चाँदनी

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1.
तप करता
श्मशान में रात को
अघोरी चाँद। !

2.
चाँद न आया
इंतज़ार करती
रात परेशाँ। 

3.
वादाख़िलाफ़ी
चाँद ने की आज भी  
फिर न आया। 

4.
ख़्वाबों में आई
दबे पाँव चाँदनी
बरगलाने।

5.
तमाम रात
आँधियाँ चलीं, पर
चाँद न उड़ा।

6.
पूरनमासी
जिनगी में है लाई
पी का सनेस।

7.
नशे में धुत्त
लड़खड़ाता चाँद
झील में डूबा।

- जेन्नी शबनम (11. 4. 2014)
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