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गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

450. चाँद-चाँदनी (चाँद पर 7 हाइकु) पुस्तक 53,54

चाँद-चाँदनी

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1.
तप करता
श्मशान में रात को
अघोरी चाँद। !

2.
चाँद न आया
इंतज़ार करती
रात परेशाँ। 

3.
वादाख़िलाफ़ी
चाँद ने की आज भी  
फिर न आया। 

4.
ख़्वाबों में आई
दबे पाँव चाँदनी
बरगलाने।

5.
तमाम रात
आँधियाँ चलीं, पर
चाँद न उड़ा।

6.
पूरनमासी
जिनगी में है लाई
पी का सनेस।

7.
नशे में धुत्त
लड़खड़ाता चाँद
झील में डूबा।

- जेन्नी शबनम (11. 4. 2014)
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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

449. समय-रथ (समय पर 4 हाइकु) पुस्तक 53

समय-रथ 

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1.
रोके न रुके 
अपनी चाल चले 
समय-रथ। 

2.
न देख पीछे 
सब अपने छूटे
यही है सच। 

3.  
नहीं फूटता 
सदा भरा रहता
दुःखों का घट।   

4.
स्वीकार किया 
ज़िन्दगी से जो मिला 
नहीं शिकवा। 

- जेन्नी शबनम (24. 3. 2014)
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