Thursday, April 17, 2014

450. चाँद-चाँदनी (चाँद पर 7 हाइकु)

चाँद-चाँदनी
(चाँद पर 7 हाइकु)

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1.
तप करता
श्मशान में रात को
अघोरी चाँद !

2.
चाँद न आया
इंतज़ार करती
रात परेशाँ !

3.
वादाखिलाफ़ी
चाँद ने फिर से की 
फिर न आया !

4.
ख़्वाबों में आई
दबे पाँव चाँदनी
बरगलाने ।

5.
तमाम रात
आँधियाँ चली, पर
चाँद न उड़ा ।

6.
पूरनमासी
जिनगी में है लाई
पी का सनेस ।

7.
नशे में धुत्त
लड़खड़ाता चाँद
झील में डूबा ।

- जेन्नी शबनम (11. 4. 2014)

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11 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (18-04-2014) को "क्या पता था अदब को ही खाओगे" (चर्चा मंच-1586) में अद्यतन लिंक पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

चाँद के इतने सारे रूप गुलज़ार साहब के बाद यहीं देख रहा हूँ!! एक बार मैंने भी ट्राई किया था!! सारे के सारे बहुत ही ख़ूबसूरत हैं. दो और तीन पुनरावृत्त हुए हैं और पूरनमासी ने मन मोह लिया, शब्दों के चयन के कारण!!

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर हायकू.
नई पोस्ट : सृष्टि का नियंता : स्त्री या पुरुष

Aditya Tikku said...

bhavpurn-***

Vinay Prajapati said...

बहुत उम्दा लेख!
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जानिए - ब्लॉग साइडबार की 5 प्रमुख ग़लतियाँ

Vaanbhatt said...

सुन्दर प्रस्तुति...

अभिषेक कुमार अभी said...

आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (20-04-2014) को ''शब्दों के बहाव में'' (चर्चा मंच-1588) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर

अभिषेक कुमार अभी said...

आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (20-04-2014) को ''शब्दों के बहाव में'' (चर्चा मंच-1588) पर भी होगी!
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर

Maheshwari kaneri said...

सभी हायकू बहुत सुन्दर हैं..

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर हाइकु...

Upasna Siag said...

bahut sundar hayku chand ki tarah ki chandni bikherte huye ...