Sunday, October 23, 2011

मेरे शब्द...

मेरे शब्द...

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बहुत कठिन है
पार जाना
ख़ुद से
और उन तथाकथित अपनों से
जिनके शब्द मेरे प्रति
सिर्फ इसलिए निकलते हैं कि
मैं आहत हो सकूँ,
खीझ कर मैं भी शब्द उछालूं
ताकि मेरे ख़िलाफ़
एक और
मामला
जो अदालत में नहीं
रिश्तों के हिस्से में पहुंचे
और फिर
मेरे लिए शब्दों द्वारा
एक और
मानसिक यंत्रणा !
नहीं चाहती हूँ
कि ऐसी कोई घड़ी आये
जब मैं भी बे अख्तियार हो जाऊं
और मेरे शब्द भी !
मेरी चुप्पी अब सीमा तोड़ रही है
जानती हूँ अब शब्दों को रोक न सकुंगी
ज़ेहन से बाहर आने से
मुमकिन है ये तरल होकर
आँखों से बहे या
फिर शीशा बनकर
उन अपनों के बदन में घुस जाए
जो मेरी आत्मा को मारते रहते हैं !
मेरे शब्द
अब संवेदनाओं की भाषा
और दुनियादारी
समझ चुके हैं !

- जेन्नी शबनम (अक्टूबर 22, 2011)

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15 comments:

रश्मि प्रभा... said...

नहीं चाहती हूँ
कि ऐसी कोई घड़ी आये
जब मैं भी बे अख्तियार हो जाऊं
और मेरे शब्द भी !...uski yantrana bhi neend le jati hai...

रश्मि प्रभा... said...

दीपावली की शुभकामनाएं

वन्दना said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ ………

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

शब्दों को रोक न सकुंगी
ज़ेहन से बाहर आने से
मुमकिन है ये तरल होकर
आँखों से बहे या
फिर शीशा बनकर
उन अपनों के बदन में घुस जाए....

अद्भुत रचना....
सादर...

Mukesh Kumar Sinha said...

jenny di aapke shabd sach me bahut kuchh kah jate hain:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

कल के चर्चा मंच पर, लिंको की है धूम।
अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।
--
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

अनुपमा पाठक said...

नहीं चाहती हूँ
कि ऐसी कोई घड़ी आये
जब मैं भी बे अख्तियार हो जाऊं
और मेरे शब्द भी !
नियंत्रण तो आवश्यक है ही...
सुन्दर भाव!

Kailash C Sharma said...

मेरे शब्द
अब संवेदनाओं की भाषा
और दुनियादारी
समझ चुके हैं !

बहुत सारगर्भित अभिव्यक्ति...बहुत सुन्दर...दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

आशा जोगळेकर said...

मेरे शब्द
अब संवेदनाओं की भाषा
और दुनियादारी
समझ चुके हैं !

वाह ।

कुश्वंश said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

Rajesh Kumari said...

bahut sundar bhaav.happy diwali.

संजय भास्कर said...

प्रभावशाली प्रस्तुति
आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

संजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

सहज साहित्य said...

एक और
मामला
जो अदालत में नहीं
रिश्तों के हिस्से में पहुंचे
और फिर
मेरे लिए शब्दों द्वारा
एक और
मानसिक यंत्रणा !
-इन पंक्तियों में अपनों( वे अपने जो भावना का ख्याल ही नहीं रखते) के कृत्य को बखूबी चित्रित किया गया है।

Minakshi Pant said...

बहुत खूबसूरत रचना |

Minakshi Pant said...

बहुत खूबसूरत रचना |