कम्फर्ट ज़ोन से बाहर
***
कम्फर्ट ज़ोन से बाहर
***
मुट्ठी से फिसल गया
गंगा
भटकना
वसीयत
प्रकाश-पर्व
***
1.
धूम-धड़ाका
चारों ओर उजाला
प्रकाश-पर्व।
2.
फूलों-सी सजी
जगमग करती
दीयों की लड़ी।
3.
जगमगाते
चाँद-तारे-से दीये
घोर अमा में।
4.
झूमती गाती
घर-घर में सजी
दीपों की लड़ी।
5.
झिलमिलाता
अमावस की रात
नन्हा दीपक।
6.
फुलझड़ियाँ
पटाखे और दीये
गप्पे मारते।
7.
दीवाली बोली-
दूर भाग अँधेरे!
दीया है जला।
8.
रोशनी खिली
अँधेरा हुआ दुःखी
किधर जाए।
9.
दीया जो जला
सरपट दौड़ता
तिमिर भागा।
10.
रिश्ते महके
दीयों संग दमके
दीवाली आई।
-जेन्नी शबनम (14.11.2020)
_____________________
जिया करो
हम
कपट
______________________________
इकिगाई
***
बापू हमारे
*******
1.
एक सिपाही
अंग्रेज़ो पर भारी,
मिला स्वराज।
2.
देश की शान
जन-जन के प्यारे
बापू हमारे।
3.
क़त्ल हो गया
अहिंसा का पुजारी,
अभागे हम।
4.
बापू का मान
हमारा अभिमान,
अब तो मानो।
5.
अस्सी थी उम्र,
अंग्रेज़ो को भगाया
निडर काया।
6.
मिली आज़ादी
साथ मिला संताप
शोक में बापू।
7.
माटी का पूत
माटी में मिल गया
दिला के जीत। (बापू)
8.
निहत्था लड़ा
अस्सी साल का बूढ़ा,
कभी न हारा। (बापू)
9.
अकेला बढ़ा
कारवाँ साथ चला
आख़िर जीता। (बापू)
10.
सादा जीवन
कड़ा अनुशासन
बापू की सीख।
- जेन्नी शबनम (2. 10. 2020)
_____________________